महाविद्यालय का परिचय

जगन्नाथ प्रसाद भगवान देई साहु कन्या महाविद्यालय, लखनऊ की स्थापना, जगन्नाथ प्रसाद साहु विद्यालय संस्थान द्वारा की गई है। लाला जगन्नाथ प्रसाद साहु जी ने इस आर्थिक रूप से जर्जर एवं अविकसित क्षेत्र में ज्ञान का प्रकाश बिखेर कर भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिये एक बालकों का विद्यालय और एक कन्याओं के लिए उच्च शिक्षा का महाविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लेकर दिनांक 30 सितम्बर, 1967 को जगन्नाथ प्रसाद साहु विद्यालय संस्थान की स्थापना की थी। उन्होंने बालकों का विद्यालय इण्टर स्तर तक पूर्ण रूप से विकसित किया तथा कन्या महाविद्यालय स्थापित करने की परिकल्पना कर ही रहे थे कि उनका स्वर्गवास हो गया। पति के संकल्प को मूर्तिरूप देने के लिये प्रतिबद्ध दृढ़ निश्चयी श्रीमती भगवान देई साहु द्वारा एक प्रेक्षागृह की स्थापना करके अग्रभाग में अज्ञानता के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश बिखेरने वाली देवी शक्ति के रूप में वीणा वादिनी सरस्वती की भव्य प्रतिमा की स्थापना करवायी। धनाभाव के कारण प्रेक्षागृह के निर्माण की प्रगति नहीं हो सकी जो निरन्तर सालती रही। उनकी इस पीड़ा को मैं जब भी उनके दर्शन करने जाता, उनके मुख मण्डल पर देखते। दिनांक 15 दिसम्बर, 2001 को हमने जब उन्हें प्रेक्षागृह निर्माण की योजना बतायी तब उन्होंने तुरन्त साहु शीतल प्रसाद दातव्य संस्थान, शीतल धर्मशाला, नाका हिंडोला से 5 लाख रूपये देने की स्वीकृति देकर कार्य को प्रारम्भ करने की अनुमति दी। अथक प्रयास से प्रेक्षागृह निर्मित हुआ प्रेक्षागृह के उद्घाटन के अवसर पर अश्रुपूर्ण नेत्रों में खुशी भरकर अपने पति के संकल्प को दोहराया। हमने उन्हें आश्वस्त किया कि ईश्वर की इच्छा और उनकी प्रेरणा बनी रही तो निश्चित रूप से वह अपने जीवन में पति के संकल्पों की पूर्णता की साक्षी बनेगी। कन्या महाविद्यालय हेतु राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का प्रयास द्रुतगति से चल रहा था। दैवयोग से वह संकल्पों के पूर्णता के प्रयासों की साक्षी बनी। किन्तु 17 सितम्बर, 2005 को उनकी पूर्णात्मा अपने शरीर से मुक्ति पा जाने के कारण संकल्प की पूर्णता की साक्षी न बन सकी। परन्तु हम सब प्रयास करते रहे। उ॰ प्र॰ शासन द्वारा अनापत्ति प्राप्त हुई और अगस्त 2007 में लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्धता भी प्राप्त हो गयी। 15 अगस्त, 2007 को प्रथम बार कन्या महाविद्यालय में झंडारोहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। वर्तमान में यह महाविद्यालय सहशिक्षा के रूप में मान्य हुआ और इसका संशोधित नाम जगन्नाथ प्रसाद भगवान देई साहु महाविद्यालय हो गया। महाविद्यालय का भवन समस्त जन सुविधाओं से युक्त भव्य, प्राकृतिक सौन्दर्य से सराबोर विशाल परिसर, समृद्ध पुस्तकालय/लैब, सर्वांगीण विकास हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संयोजन के लिए कलात्मक प्रेक्षागृह विद्या अध्ययन का वातावरण निर्मित करने में स्वयं सिद्ध है। वर्तमान में महाविद्यालय को कला एवं वाणिज्य संकाय की लखनऊ विश्वविद्यालय से स्थायी सहयुक्तता प्राप्त है और वहाँ सहशिक्षा (छात्र/छात्रायें) अध्ययनरत हैं। वर्ष 2011 में राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई स्थापित की गई। जिससे अध्ययनरत अभ्यार्थियों को समाज सेवा के प्रति प्रेरित किया जाता है तथा इससे उनके व्यक्तित्व का भी विकास होता है। राजार्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय इलाहाबाद का अध्ययन केन्द्र भी इस महाविद्यालय से संचालित है। जिससे अभ्यार्थी अध्ययन के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न कोर्स भी कर सकते हैं। इस प्रकार हमारा सदैव प्रयास रहेगा कि (युवा वर्ग) को उच्च शिक्षित करके उनके मन में स्वाभिमान, स्वालम्बन, विनम्रता, शालीनता, सचरित्रता, व्यवहारिकता एवं सुसंस्कारों को जागृत करें नवात्थान का मार्ग प्रशस्त कर सकें जिससे सम्पूर्ण समाज सुशिक्षित, सभ्य, सुसंस्कृत, स्वावलम्बी, समरस एवं सामथ्र्य पूर्ण बन सके। भविष्य में हम इस महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रूप में स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं।
महाविद्यालय प्रबन्ध समिति


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