M.D. Message

Mr. Radheyshyam Sahu (Advocate)



" जाके पैर ना हुई बेवाई , ऊ का जाने पीर पराई "

अशिक्षा का दंश कितना पीड़ा दायक होता है इससे मुक्त होने का केवल उपाय पीड़ित प्राणी अपने सद्प्रयाशों से करते हुए ज्ञान का प्रकाश जन जन में पहुंचे इसे मूर्ति रूप देने स्व श्रीमती भवन देई साहू ने मुझे और मेरे सहयोगी श्री डी. पी . गुप्ता के समक्ष रख कर इस अविकसित क्षेत्र की कन्याओं के उच्च शिक्षा ब्यवस्था हेतु कन्या महाविद्यालय स्थापित करने के लिए प्रेरित किया | स्वयं अशिक्षित होकर आने वाली पीडियों को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने की उनकी अभिलाषा ने उनके मृत्यु के उपरांत सन २००७ में पूर्णता प्राप्त की तबसे निरंतर यह जगन्नाथ प्रसाद भगवान देई साहू कन्या महाविद्यालय जो लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ता प्राप्त है , बी . ए. और बी . काम में शत प्रतिशत परिणाम देकर क्षेत्र की कन्याओं को स्नातक बनाकर उच्च शिक्षा की क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है | हमें गर्व है महाविद्यालय की कर्मठ , कुशल प्रशासक योग्य शिक्षिका की गुणों से मंडित प्रधानाचार्या तथा उच्च शिक्षित समर्पित कर्मयोगी शिक्षिकाओं पर और विशेष रूप से श्री डी. पी . गुप्ता पर जिनके अथक परिश्रम से यह महाविद्यालय शिक्षा का प्रकाश चारो ओर बिखेर रहा है | इस महाविद्यालय ने अल्प काल में ही अपनी कीर्ति स्थापित कर ली है | वर्तमान में उच्च शिक्षा प्रत्येक युवा का स्वप्न है | स्थानीय छात्राओं में उच्च शिक्षा की प्रति ललक होने की बावजूद उन्हें इससे बंचित होना पड़ता था | संस्थापक एव प्रबंध समित की अथक प्रयास सक्रियता से २००७ से यह महाविद्यालय प्रारम्भ हुआ | सर्व सुविधा युक्त महाविद्यालय छात्राओं को अतयंतल्प शुल्क में बेहतर शिक्षण परिवेश उपलब्ध करने में कटिबद्ध है | छात्राओं महाविद्यालय का यह शैशव काल है और ज्ञातब्य है कि गत सत्र यहाँ छात्राओं का शत-प्रतिशत परीक्षा फल रहा है | बालक एव बालिकाओं के प्रचार-प्रसार की दृस्टि से यह तथ्य प्रमुखता से रेखांकित किया जाना चाहिए | महाविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन की समुचित व्यवस्था है |

श्री राधेश्याम शाहू ( अधिवक्ता )


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